इलाहाबाद विश्वविद्यालय की हालत हुई बद से बदतर, टॉप 200 से भी हुआ बाहर
पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय को एक बार फिर से तगड़ा झटका लगा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी किए गए विश्वविद्यालयों के रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की रैंक इस बार बद से भी बदतर हो गई है और वह टॉप 200 यूनिवर्सिटीज की लिस्ट से भी बाहर हो गया है।
साल 2016 से एमएचआरडी मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों की रैंकिंग की सूची जारी करना शुरू किया था। उस समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय 67 वें पायदान पर था। 2017 में वह 27 पायदान की खिसककर 95 स्थान पर आ गया। 2018 में इस विश्वविद्यालय की रैंकिंग 150 के अंदर थी। मगर 2019 में जब सूची जारी हुई तो सब लोग हैरान रह गए क्योंकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षक इस बार रैंकिंग में बेहतरी की उम्मीद जता रहे थे। मगर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तो इस बार टॉप 200 यूनिवर्सिटीज की लिस्ट से भी बाहर हो गया है। 125 वर्षों से भी पुराने इस विश्वद्यालय की यह हालत अंदाजा लगाने से भी बुरी है क्योंकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में देश को बहुत कुछ दिया है।
इस सूची में ट्रिपल आईटी ने लगातार दूसरी बार टॉप 100 में अपनी जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है। 2017 और 2016 में ट्रिपल आईटी टॉप 100 में अपनी जगह नहीं बना पाया था। उसके बाद 2018 और 2019 में वह तमाशा 90 और 82 पायदान पर रहा।
एमएनआईटी भी इस बार भी टॉप 50 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा। 2016 में एमएनआईटी की रैंकिंग 23 वीं थी। वहीं 2017 में वह 41 वें पायदान पर पहुंच गया था। 2018 में एमएनआईटी की रैंकिंग 48वीं थी जबकि 2019 मे एमएनआईटी 48 वें पायदान से खिसककर 42 वें पायदान पर आ गया और एक बार फिर से वह टॉप 50 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय को इस बार बी प्लस प्लस की ग्रेडिंग मिली है। लगातार इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपनी गरिमा को खोता जा रहा है क्योंकि यह वही विश्वविद्यालय है। जिसने इस देश को नेतृत्व करने वाले कई राजनेता प्रधानमंत्री दिए हैं।
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